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Tuesday, August 6, 2013

रुपये की कीमत सर्वकालिक निचले स्तर पर

पंडित : अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में मंगलवार को भी गिरावट रही, और वह 61.80 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार में मंगलवार के कारोबार के शुरुआती दौर में ही रुपये में यह गिरावट दर्ज की गई, हालांकि बाद में वह कुछ सुधरकर 61.57 के स्तर पर पहुंच गया।

उल्लेखनीय है कि 8 जुलाई को भी रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 61.21 का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ था। वैसे सोमवार को भी रुपया गिरावट के साथ 60.88 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। उधर, यह गिरावट इसलिए भी उल्लेखनीय और आश्चर्यजनक है, क्योंकि डॉलर में भी कुछ अन्य बड़ी मुद्राओं की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। इस गिरावट का असर शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा है, और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स भी मंगलवार को लगभग डेढ़ महीने बाद एक बार फिर 19,000 के स्तर से नीचे पहुंच गया। पिछली बार सेंसेक्स 19,000 से नीचे इसी साल 27 जून को गया था।

बताया जा रहा है कि अमेरिका में रोजगार के नए आंकड़ों के आने के बाद अमेरिका के केंद्रीय ने बैंक ने आर्थिक सुधारों के लिए दी जा रही छूट में सावधानी से कमी करने का मन बनाया है। पिछले हफ्ते भी रुपये में रिकॉर्ड गिरावट देखी गई थी, जो करीब 22 महीने की सबसे बड़ी गिरावट थी। मात्र पिछले सप्ताह में भारत की इस आंशिक रूप से परिवर्तनीय मुद्रा में 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उल्लेखनीय है कि आरबीआई द्वारा रुपये की गिरती साख को बचाने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों के बावजूद रुपये का इस तरह कमजोर होना जारी है।

आरबीआई को भी उम्मीद है कि रुपये की मजबूती के लिए देश में विदेशी निवेश की आवक बढ़नी चाहिए, वहीं सरकार ने कदम के सामने विपक्षी दलों की मांग एक रोड़े के रूप में काम कर रही है।

Friday, March 15, 2013

गैलेक्सी एस4

सैमसंग ने अपने मोस्ट वेटिंग स्मार्टफोन गैलेक्सी एस4 को लॉन्च कर दिया। न्यूयॉर्क में एक भव्य प्रोग्राम (जिसकी तस्‍वीरें आगे के स्‍लाइड्स में आप देख सकेंगे) में सैमसंग मोबाइल कम्युनिकेशन के हेड जे. के. शिन ने इसे पेश किया।

गैलेक्सी एस4 में कई नए आकर्षक फीचर्स हैं। 13 मेगापिक्सल कैमरे के साथ इस स्मार्टफोन से 4 सेकंड में 100 शॉट लिए जा सकेंगे। एस4 में रियल टाइम ट्रांसलेटर के रूप में सैमसंग ने एक जबरदस्त फीचर जोड़ा है। इसकी मदद से किसी भी दूसरी भाषा को अपनी भाषा में ट्रांसलेट किया जा सकेगा।
गैलेक्सी एस4 में आई ट्रैकिंग फीचर भी दिया गया है। इसकी मदद से मोबाइल से नजर हटते ही वीडियो अपने आप रुक जाएगा। दोबारा मोबाइल की तरफ देखने पर वहीं से वीडियो फिर से प्ले हो जाएगा। दिलचस्प है कि सैमसंग के इस फोन से सोनी एक्सपीरिया जेड10, ब्लैकबेरी जेड 10, एचटीसी वन और आईफोन 5 जैसे फोन को तगड़ी टक्कर मिलने की बात की जा रही है।

Sunday, September 23, 2012

सवाल प्रधानमंत्रीजी से कारपोरेट जगत ख़ास या आम इन्सान सवाल यह भी है कि इसी दौर में पश्चिमी मीडिया ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आर्थिक सुधार को लेकर ना सिर्फ सीधा निशाना साधा बल्कि इतिहास के पन्नो में असफल प्रधानमंत्री की दिशा में बढ़ते कदम की लकीर भी खींच दी। 8 जुलाई को टाइम मैग्जीन ने मनमोहन सिंह को कवर पर छाप कर अंडरएचीवर का तमगा दिया। हफ्ते भर बाद ही 16 जुलाई को ब्रिटेन के अखबार द इंडिपेन्टेंट ने आर्थिक सुधार के पुरोधा के तौर पर वित्त मंत्री के पद से शुरु हुये मनमोहन सिंह को एक कमजोर और बंधे हाथ के साथ पीएम की कुर्सी पर बैठे देखा। वहीं 5 सितंबर को वाशिंगटन पोस्ट ने तो मनमोहन सिंह की खामोशी में एक त्रासदीदायक पीएम की छवि देखी, जो दांत के डाक्टर के पास जाकर भी मुंह नहीं खोलते हैं। तो अब माना क्या जाये कि देश के सबसे पिछड़े इलाके संथाल परगना से लेकर दुनिया के सबसे विकसित देश अमेरिका तक में जब मनमोहन सिंह ही मनमोहन सिंह है तो यह लोकप्रियता है या फिर त्रासदी। यह सवाल इसलिये क्योंकि मौजुदा वक्त में देश की मुख्यधारा की मीडिया में भी अस्सी फीसदी हिस्सा मनमोहन सिंह के ही इर्द-गिर्द रचा हुआ है। राष्ट्रीय पत्रिका इंडिया टुडे तो कवर पेज पर "सरकार का मुंह काला" तक लिखती है। लेकिन क्या कांग्रेस सरकार आह तक नहीं करती। आह करती है तो टाइम मैग्जीन या वाशिंगटन पोस्ट पर, उसकी रिपोर्ट को लेकर, जिसकी कुल जमा आठ हजार कापी ही भारत आती हैं। जबकि देश भर में जितनी पत्र पत्रिकाओं में मनमोहन सिंह निशाने पर हैं, अगर उसका आंकड़ा जमा करे तो दस करोड़ पार कर जाएगा। तो क्या यह माना जा सकता है कि मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री होकर भी भारत के भीतर भारत से इतर एक नया समाज बनाने में लगे रहे। जिसकी जमीन आर्थिक सुधार पर खड़ी है। यह सवाल इसलिये क्योंकि टाइम, इंडिपेन्डेंट और वाशिंगटन पोस्ट के निशाने पर मनमोहन सिंह आर्थिक सुधार को ना चला पाने को लेकर ही है। यह तमाम पत्रिकायें ही मनमोहन सिंह का सच यह कहकर बताती हैं कि 24 जुलाई 1991 में भारत के दरवाजे जिस तरह वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने दुनिया के लिये खोले वह अपने आप में एक अद्भभूत कदम था। हर रिपोर्ट दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की मौजूदगी दर्ज कराने के लिये मनमोहन सिंह को ही तमगा देती है। चाहे न्यूक्लियर डील हो या एक दर्जन सरकारी सेक्टर का दरवाजा विदेशी निवेश के लिये खोलने की पहल। वाह-वाही मनमोहन सिंह की पश्चिमी मीडिया झूम झूम कर करता है। लेकिन झटके में 2009 के बाद जब राडिया टेप से कलाई खुलनी शुरु होती है कि असल में देश में सरकार बनी तो नागरिकों के वोट से है लेकिन सारी नीतियां कारपोरेट के लिये कारपोरेट ही अपने कैबिनेट मंत्रियों की जरीये बना रहा है, चला रहा है तो कई सवाल देश के भीतर भी खड़े होते है और कारपोरेट घरानों को भी समझ में आता है कि कौन सा घराना यूपीए-1 के दौरान लाभ पाकर बहुराष्ट्रीय कंपनी होने का तमगा पा गया और कौन सा कारपोरेट संघर्ष करते हुये मंत्रियों और नौकरशाही के जाल में ही उलझता रहा।देश के पांच टॉप मोस्ट कारपोरेट इस दौर में खुद को बहुराष्ट्रीय इसलिये बना गये क्योंकि उन्हें देश चलाने की छूट विकास के नाम पर नीतियों के आसरे मिली और उसकी कमाई से देसी कारपोरेट ने दुनिया के दर्जन भर देशों की कंपनियों को खरीद लिया। यह खरीदारी खनन से लेकर स्टील और ऊर्जा से लेकर कार की खरीद तक रही। यह सवाल बीते ढाई बरस में कही ज्यादा तीखे या त्रासदीदायक इसलिये भी हुये क्योंकि 2 जी स्पेक्ट्रम के साथ ही क्रिक्रेट के नाम पर आईपीएल के धंधे। कामनवेल्थ के सफल आयोजन से राष्ट्रीयता का टीका लगाने में लूट। और देश के खनिज संसधानों की लूट के लिये देश का दरवाजा ही नहीं सुरक्षा की दीवार भी गिराने का सच सामने आया। सुरक्षा का सवाल इसलिये क्योंकि खनिज संपदा की लूट में जुटी देसी कारपोरेट के कर्मचारी-अधिकारियों में विदेशी नागरिको की भरमार है। जापान, चीन, आस्ट्रेलिया, ब्रिट्रेन, कोरिया और अमेरिकी अधिकारी देश के उन पिछडे इलाको में खुले तौर पर देखे जा सकते हैं जहां खनन से लेकर पावर प्लांट का काम हो रहा है। जबकि देश में इंदिरा गांधी ने ही कोल इंडिया के राष्ट्रीयकरण के साथ यह कानून भी जोड़ा था कि कोई विदेशी नागरिक भारत के खनिज संपदा इलाको में किसी भी तरह की कोई नौकरी नहीं कर सकता। क्योंकि नेहरु के दौर से ही खनिज संपदा को देश की राष्ट्रीय सपंत्ति मानी गई। साथ ही यह माना गया कि देश की खनिज संपदा की जानकारी कभी विदेशियों को नहीं होनी चाहिये। यानी सुरक्षा के लिहाज से देश ने माना खनिज संपदा ही अपनी है और इस पर आंच आने नहीं दी जायेगी। लेकिन यह किसे पता था कि आर्थिक सुधार का मतलब खनिज संपदा को अंतराष्ट्रीय बाजार के लिये खोलना ही होगा। तो क्या इस दौर में मनमोहन सिंह की अर्थव्यवस्था ने भारत को दुनिया का ऐसा केन्द्र बना दिया, जहां उपभोक्ता खुली मंडी के तौर पर भारत को देखे। कुछ हद तक यह माना जा सकता है क्योंकि मौजूदा वक्त में भारत के संचार, जहाज रानी, नागरिक उड्डयन, इन्फ्रास्ट्कचर, उर्जा, आईटी और खनन के क्षेत्र में दुनिया 135 निजी कंपनियां परोक्ष या अपरोक्ष तौर पर काम कर रही हैं। और दुनिया के 100 से ज्यादा उघोग अलग अलग क्षेत्र में भारत को मशीन या तकनालाजी उपलब्ध करा रहे हैं। यानी समूची दुनिया में भारत अपनी तरह का पहला देश है, जहां सीरिया या इरान सरीखा सकंट नहीं है। बल्कि सरकार को अब भी जनता चुनती है।लेकिन दुनिया की सबसे ज्यादा निजी कंपनियों की अर्थव्यवस्था या कहें मुनाफा भारत पर टिका है। सीरिया या ईरान का जिक्र इसलिये क्योंकि वाशिंगटन पोस्ट में पीएम की धुनाई के बाद पीएमओ में बैठे मीडिया सलाहकारो ने यही फैलाया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चूंकि गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में ईरान के साथ खड़े हुये। सीरिया के सवाल को उठाया और दुनिया के निजाम को बदलने का वक्तव्य दिया तो मनमोहन सिंह पर अमेरिका अब निशाना साध रहा है। इसमें दो मत नहीं कि इरान या सीरिया को लेकर अमेरिका जैसा सोचता है, वैसा भारत ना सोच रहा है और ना ही अमेरिका के अनुकुल कदम उठा रहा है। यानी अमेरिका की नाखुशी जग-जाहिर है। लेकिन इस दौर में क्या मनमोहन सिंह भी सीरिया या ईरान के शासको की तरह बर्ताव कर पा रहे हैं। जहां पहले उनके अपने नागरिक उनका अपना देश हो। जाहिर है मनमोहन सिंह की साख देश में घटी भी इसलिये है क्योंकि वह बतौर इक्नॉमिस्ट कम पीएम जो लकीर खिंच रहे हैं, उसमें देश के अस्सी करोड नागरिक कहां-कैसे फिट बैठ रहे हैं, यह एक अबूझ पहली है। और जिन 20-30 करोड़ नागरिकों के जरीये भारत के भीतर एक अलग विकसित समाज बनाने का जो ताना बना बुना जा रहा है, उसका सच इतना त्रासदीदायक है कि पश्चिमी या देसी मीडिया की कोई भी हेडलाइन कमजोर पड़ जाये। मसलन जिस पहली दुनिया में मनमोहन सिंह को मान्यता है, उसी दुनिया की सूची (वर्ल्ड इक्नामिक फोरम) में भारत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से विकास के पायदान पर 59 वें नंबर पर है । और देश के भीतर के हालात ऐसे है कि सिर्फ 35 करोड़ लोगों को ही आज की तारीख में 24 घंटे बिजली मिल सकती है। बाकियों को अंधेरे में रहना होगा। और उपलब्ध बिजली के बंटवारे के बाद किसानों के खाते में हर दिन सिर्फ 30 मिनट बिजली आएगी।कोयला, बाक्साइड, गैस, पेट्रोल, डीजल, खाद, बीज और पानी तक की कीमत क्या होगी, यह चुनी हुई सरकार तय नहीं कर सकती। बल्कि जिन कंपनियों ने इनका ठेका लिया है या कहीं जो उनके उत्पादन से लेकर बांटने में लगी है, उन्हीं का मुनाफा तय करता है कि आम नागरिक को कितनी कीमत चुकानी है। इस घेरे में पढाई-लिखाई और इलाज को भी लाया जा चुका है। लेकिन इन सबसे जुड़े कंपनियों को सरकार कितना सब्सिडी जनता या देश के पैसे में से दे देती है, यह भी हैरतअंगेज सच है। सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर को टैक्स देने में बीते तीन बरस में 2 लाख करोड से ज्यादा की छूट दे दी। यानी वह ना चुकाये। और इसी तरह एक्साइज में 423294 करोड़ और कस्टम में 621890 करोड की छूट दे दी। आप इसे कारपोरेट को मिलने वाली सब्सिडी भी कह सकते हैं।सवाल प्रधानमंत्री जी से कारपोरेट जगत ख़ास या आम इन्सान..

Friday, June 1, 2012

यूपी बजट 2012: वादों और इरादों का मेल


लखनऊ। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार ने शुक्रवार को अपना पहला बजट पेश किया। कुल दो लाख 10 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। इसमें चुनावी वादों को पूरा करने के साथ-साथ कुछ आधारभूत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए प्रयास दिखता है। पिछले बजट की तुलना में यह 18 प्रतिशत अधिक है। 13 हजार 650 करोड़ की कुल 280 योजनाएं लाई जाएंगी। चिकित्सा सुविधाओं के लिए 7033 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वादों को पूरा करने की दिशा में छात्रों को लैपटॉप और टैबलेट के लिए 2720 करोड़ की बात बजट में है। पेट्रोल पर सभी की नजरें थीं, लेकिन वैट में कोई कटौती नहीं हुई, लिहाजा लोगों को इसमें राहत नहीं मिल सकी। दिलचस्प बात यह भी रही कि पूर्ववर्ती माया सरकार में चल रही योजनाओं के नाम अब सपा के नेताओं के नाम पर रख दिए गए हैं।
मुख्य बातें:-
1. दो लाख 10 हजार करोड़ रुपये का बजट
2.13 हजार 650 करोड़ की कुल 280 योजनाएं
3. चिकित्सा सुविधाओं के लिए 7033 करोड़
4. पेट्रोल नहीं होगा सस्ता [वैट में कटौती नहीं]
5. टैबलेट के लिए 302 करोड़ रुपये और लैपटॉप के लिए 2418 करोड़ रुपये
6. सौर ऊर्जा के लिए 100 करोड़ रुपये
7. आसरा योजना के लिए 100 करोड़ रुपये
8. बैटरी रिक्शा के लिए 100 करोड़ [गरीब रिक्शे वालों को मिलेगा लाभ]
9. बुंदेलखंड के किसानों के लिए 900 करोड़
10. किसान बीमा एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख
11. लोहिया आवास योजना की होगी शुरुआत
12. अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 274 करोड़
13. चुनावी वायदों को पूरा करने के लिए 2700 करोड़

Monday, December 26, 2011

कॉफी दे : तेज दिमाग, पतली कमर

पंडित । अगर आप अच्छी याद्दाश्त की चाहत रखते हैं साथ ही कमर का घेरा बढ़ने से चिंतित हैं, तो रोज एक कप कॉफी पीने से आपको इस समस्या से निजात मिल सकती है। एक अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि कम खाना और खाने के बाद कुछ मीठे पदार्थ का सेवन करने की आदत छोड़ने की बजाय रात्रि भोजन के बाद एक कप कॉफी का सेवन अच्छी स्मरणशक्ति और कमर के बढ़ते मोटापे को रोकने में ज्यादा मददगार हो सकता है।

इटली में कम कैलोरी वाले भोजन पर हुए एक अध्ययन से यह खुलासा हुआ है कि कम भोजन का सेवन स्वास्थ्य को अच्छा बनाता है और इससे आप दीर्घायु होते हैं। वैज्ञानिक इस बात को लम्बे समय से जानते थे लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि स्वास्थ्य सुधार में कितनी कैलोरी कम करना सही होगा।

अध्ययन में स्मरणशक्ति और सीखने की प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण सीआरईबी 1 नाम के प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया गया था। शोधकर्ता जियोवामबाटिस्टा पैनि ने चूहे पर प्रयोग करते वक्त दिखाया कि कैलोरी की मात्रा कम करने से सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त उन्होंने दिखाया कि कैलोरी कम करने से दिमाग में बनने वाले प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है।

Tuesday, December 20, 2011

सरकार की नीयत साफ नहीं, होगा अनशन: अन्ना

पंडित: रालेगण सिद्धी: जनलोकपाल बिल के लिए लड़ाई लड़ रहे बुजुर्ग गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे ने कहा कि भ्रष्टाचार खत्म करने को लेकर सरकार की नीयत साफ नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें लोकपाल का नया मसौदा मंजूर नहीं.

सिटीजन चार्टर बिल पर अन्ना ने कहा कि ये बिल भी कमजोर है. अन्ना से साफ साफ कहा कि लोकपाल बिल पर सरकार बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार ने संसद का अपमान किया है.

अन्ना ने एलान किया है कि 27 दिसंबर से उनका अनशन होकर रहेगा. अलबत्ता इस बार अन्ना बेमियादी अनशन नहीं करेंगे. अन्ना ने कहा है कि 27 से 29 दिसंबर तक वो तीन दिन अनशन करेंगे इसके बाद 30 दिसंबर से तीन दिन तक जेल भरो आंदोलन होगा. ये भी तय हो गया है कि अन्ना अब दिल्ली में नहीं मुंबई में अनशन करेंगे.

अपने गांव रालेगण सिद्धी में अन्ना ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ये अन्ना का आंदोलन नहीं है ये जनता का आंदोलन है जो जनलोकपाल के लिए है. उन्होंने कहा कि जनता इस सरकार को सबक सिखाएगी.

अन्ना हजारे ने कहा कि जब तक प्राण हैं तब तक लड़ता रहूंगा. उन्होंने कहा कि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भी वे प्रचार करेंगे.

फेसबुक ने कैलिफोर्निया में बनाया अपना हेडक्‍वॉर्टर

वॉशिंगटन: सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने अपना नया हेडक्वॉर्टर कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क सिटी में बनाया है.

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट का हेडक्वॉर्टर अब आधिकारिक रूप से मेनलो पार्क में 1601 विलो रोड पर स्थित है. नया हेडक्वॉर्टर एक मिलियन स्क्वेयर फिट में है. कैंपस के अंदर 10 इमारतेहैं. इसके अंदर कोई निजि दफ्तर नही है.

2000 से अधिक कर्मचारियों को पाउलो अल्टो से यहां ट्रांसफर किया गया है. कंपनी ने अपने आधिकारिक ब्लॉग पर सोमवार को लिखा, 'आज सुबह कर्मचारियों को नए फेसबुक मेनलो पार्क परिसर के अंदर लाया गया

भगवदगीता राष्ट्रीय पुस्तक घोषित हो: सुषमा

पंडित:नई दिल्ली: रूस में गीता पर पाबंदी को लेकर भारत में चौतरफा विरोध और रूस के दुख जताने के बीच लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इसे राष्ट्रीय पुस्तक घोषित करने की मांग की है.

सुषमा का तर्क है कि अगर गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित कर दिया गया तो इससे इस पुस्तक का कोई अपमान नहीं कर सकेगा.

हालांकि, इससे पहले विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने मंगलवार को संसद को आश्वासन दिया था कि गीता पर पाबंदी को लेकर भारत ने रूसी सरकार के सामने अपना विरोध जता दिया है.

एसएम कृष्णा के बयान का स्वागत करते हुए नेता प्रति पक्ष सुषमा स्वराज ने कहा कि केवल रूसी अधिकारियों के सामने रोष जताना काफी नहीं है.

उन्होंने कहा, "सरकार को गीता पर पाबंदी हटाने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए और इसके साथ ही भगवत गीता को राष्ट्रीय पुस्तक घोषित किया जाना चाहिए."

इससे पहले विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा था, "हमारे दूतावास ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है. इस मुकदमे से जुड़े वकील मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं.

मंत्री ने कहा कि इस मामले को रूस के उच्च अधिकारियों के सामने भी उठाया गया है.

कृष्णा का कहना था, "हम इस्कॉन के वकीलों के साथ लगातार संपर्क में हैं. ऐसा लगता है कि रूस की स्थानीय अदालत में गीता के खिलाफ शिकायत किसी अज्ञानी या निहित स्वार्थी व्यक्ति ने की है."

विदेश मंत्री का कहना था कि कई रूसी विशेषज्ञों सहित भारत में रूस के राजदूत अलेक्जेंडर एम कडादीन भगवद गीता को अच्छी तरह से समझते हैं और जानते हैं कि इस धार्मिक पुस्तक को अपार सम्मान के साथ लिखा गया है.

विवाद

रूस में भगवदगीता पर पाबंदी को लेकर एक अदालत में यह मामला छह महीने पहले दायर हुआ था, फिलहाल इस मामले की सुनवाई 28 दिसंबर तक टाल दी गई है.

साइबेरिया के तोम्स्क की एक अदालत में इस्कॉन के संस्थापक एसी भक्ति वेदांत स्वामी प्रभुपाद की लिखी 'भगवद्गीता ऐज इट इज' के रूसी भाषा के संस्करण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.

इसे उग्रवादी साहित्य कहकर साइबेरिया के तोमस्क की एक अदालत में चुनौती दी गई है.

विरोध के बीच सिटीजन चार्टर बिल संसद में पेश

पंडित : नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने मंगलवार को लोकसभा में सिटीजन चार्टर बिल पेश कर दिया. इस बिल को इस महीने की शुरुआत में कैबिनेट ने मंजूरी दी थी.

विधेयक में प्रत्येक नागरिक को समय बद्ध तरीके से सामान और सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ शिकायतों के निवारण का अधिकार दिया गया है यानी सरकारी महकमों में कौन से काम कितने दिनों में होंगे इसका लेखा-जोखा दिया गया होगा और सरकारी अधिकारी को किसी काम को तय समय सीमा के भीतर ही करने होंगे. अगर ऐसा नहीं होता है तो शिकायत की जा सकेगी.

कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बिल इसी सत्र में पारित हो जाएगा.

सरकार ने सिटीजन चार्टर बिल एक ऐसे समय में पर पेश किया है, जब टीम अन्ना इसे लोकपाल के दायरे में लाने की मांग कर रही है. टीम अन्ना ने मंगलवार को सरकार के जरिए सिटीजन चार्टर बिल पेश करने की आलोचना की है.

इस बिल के तहत पंचायत स्तर से लेकर केन्द्रीय कार्यालयों में शिकायत निवारण अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है. साथ ही साथ नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिये केन्द्रीय लोक शिकायत निवारण आयोग की स्थापना की व्यवस्था भी की गई है.

लोकपाल 'पास' कराने के लिए सत्र को बढ़ाया गया

पंडित : केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद के शीतकालीन सत्र को तीन के लिए बढ़ाने का फैसला किया. माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम विवादास्पद लोकपाल विधेयक को संसद में पारित कराने के लिए किया है.

शीतकालीन सत्र 22 दिसंबर को समाप्त हो रहा था, जिसे 27, 28 और 29 दिसंबर तक के लिए बढ़ाया गया और इस तरह अब संसद की कार्यवाही 29 दिसंबर को समाप्त होगी.

संसदीय कार्य राज्य मंत्री हरिश रावत ने कहा कि इन तीन दिनों में लोकपाल विधेयक, न्यायिक जवाबदेही विधेयक और व्हिसल ब्लोअर बिल पर चर्चा होगी.

संसदीय कार्य राज्य मंत्री का कहना था कि शीतकालीन सत्र के विस्तार का फैसला विपक्षी और सहयोगी दलों से चर्चा के बाद किया गया.

इस बीच खबर है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकपाल के अंतिम ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी है. यह बिल अब प्रधानमंत्री के नोट के साथ कानून मंत्रालय के पास भेजा जाएगा, जहां फिर इस कैबिनेट के पास रखा जाएगा.

लोकपाल के फाइनल ड्राफ्ट पर मंगलवार की शाम कैबिनेट की बैठक हो सकती है, हालांकि पिछले दो दिनों से इस पर कैबिनेट की बैठक टल रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक लोकपाल के फाइनल ड्राफ्ट पर मंत्रियों के बीच ही आम सहमति नहीं बन पा रही है.

दूसरी टीम अन्ना का रुख सख्त नजर आ रहा है, जहां सरकार ने शीतकालीन सत्र को बढ़ाने का फैसला किया है, वहीं टीम अन्ना के सदस्य कुमार विश्वास ने स्टार न्यूज़ से कहा कि 27 दिसंबर को अन्ना का प्रस्तावित अनशन ज़रूर होगा.

उनकी दलील है कि ऐसा इसलिए किया जाएगा, ताकि जनता को यह बताया जा सके सरकार लोकपाल को लेकर किस कदर टालमटोल का रवैया अपना रही है.



यूपी विभाजन मामले में केंद्र पर बरसीं मायावती

पंडित : उत्तर प्रदेश विधानसभा के जरिए पारित राज्य के बंटवारे के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की ओर से सवाल खड़े किए जाने से नाराज़ मायावती केंद्र की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर जमकर बरसीं.

उन्होंने कहा कि लगता है विधानसभा के प्रस्ताव का केंद्र की नजर में कोई मोल नहीं है.

उन्होंने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सरकार के रवैया से लगता है कि केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश के बंटवारे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की बजाए लटकाने में लगी हुई है."

हालांकि, मायावती ने स्वीकार किया केंद्र की ओर से प्रस्ताव को लौटाया नहीं गया है, बल्कि उस पर कुछ सवाल जरूर खड़े किए गए हैं.

बकौल मायावती केन्द्र सरकार की ओर से भेजा गया पत्र संविधान द्वारा राज्यों के पुनर्गठन के विषय में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन है.

मायावती ने मांग की कि उत्तरांचल के गठन के लिए अपनाई गयी प्रक्रिया के अनुरूप उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन के लिए भी कार्रवाई की जानी चाहिए.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को केंद्र सराकर ने मायावती के राज्य के बंटवारे के प्रस्ताव पर सवाल खड़ा करते हुए राज्य सरकार को एक पत्र भेजा था.



Thursday, December 1, 2011

छोटे दुकाननदारों को नहीं खतरा !

पंडित-: रिटेल मार्केट को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने के फैसले पर जो विरोध हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है.

यह फैसला बहुत सोच-समझ कर लिया गया है. इससे हमारी अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है. एफडीआई की मंजूरी के बाद पूंजी जुटाने की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी. यह मुद्दा वर्षों पुराना है. एनडीए के दौर से ही इस पर बात चल रही है. नीतिगत स्तर पर फैसले लेने में देरी पर सवाल भी उठे थे.

लेकिन अब जब कि सब पटरी पर है, विरोध के स्वर उठने लगे हैं. गौर करन वाली बात यह है कि देश में पिछले दस सालों में कई रिटेल कंपनियां उभरी हैं. विभिन्न शहरों में इनके स्टोर हैं लेकिन कहीं से भी प्रत्यक्षत: यह बात सामने नहीं आई कि छोटे किराना दुकानदारों का धंधा चौपट हुआ हो. फिर सरकार ने संभावित कुछ खतरों से निपटने के लिए इसमें कुछ प्रावधान भी कर रखे हैं. ऐसे में छोटे दुकानदारों के लिए डरने वाली कोई बात नहीं है.

आज देश में रिटेल का बाजार प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है. हमारी आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में छह दशमलव 9 प्रतिशत की रही है जो पिछले दो सालों में सबसे कम है. जाहिर है वैश्विक अर्थव्यवस्था का मंदी के दौर में जाने का असर हम पर भी पड़ रहा है. ऐसे में रिटेल में निवेशकों के आने से हमारी अर्थव्यवस्था को गति ही मिलेगी. फिर लाखों लोगों को रोजगार मिलना भी तय है.

विपन्नता के दौर में फंसे किसानों का भी अपनी उपज का वाजिब दाम मिलेगा. कालाबाजारियों और बिचौलियों पर आफत आएगी. इतना ही नहीं, फल-सब्जी और अनाज के भंडारण में भी करोड़ों का निवेश होगा जिससे इनकी बर्बादी रुकेगी. इससे कृषि क्षेत्र की विकास दर में बढ़ोतरी तय है. जो इस आशंका में हैं कि ऐसा होने से कीमतें बढ़ेंगी, वे भ्रम में हैं. कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण हर हाल में कीमतों पर नियंत्रण बना रहेगा. एक अनुमान के मुताबिक अगले पांच सालों में इससे 10 बिलियन डॉलर की राशि अपने देश में आएगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए पुश अप का काम करेगी.

मेरी समझ से सरकार ने एक समझ भरा और संतुलित कदम उठाया है. सरकार ने केवल उन्हीं शहरों में रिटेल स्टोर खोलने की इजाजत दी है, जहां की आबादी 10 लाख से अधिक है. ऐसे में छोटे शहरों और कस्बे के कारोबारियों पर तो कोई असर ही नहीं पड़ने वाला. रही बात बड़े शहरों की तो वहां भी अप्रत्यक्ष तौर पर कारोबारियों को नुकसान नहीं होने वाला. मैंने बड़े शहरों में मौजूद देसी रिटेल स्टोर का प्रभाव कहीं भी गलत नहीं देखा है.

ये स्टोर और हाट-बाजार या छोटी दुकानें एक-दूसरे के पूरक के तौर पर ही काम करती हैं. विदेशी कंपनियां कहीं से भी किसी का नुकसान करने की स्थिति में नहीं होंगी. यहां तक कि उन्हें अपनी पूंजी का एक बड़ा हिस्सा कोल्ड स्टोरेज चेन बनाने और कच्चे सामान की परिवहन व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगाना होगा. इतना ही नहीं, कुल खरीद का 30 प्रतिशत हिस्सा उन्हें छोटे और मझोले उद्यमों से उठाना होगा. ऐसे में नुकसान होने की बात समझ से बाहर है.

बहरहाल, आशंका की कोई वजह नहीं. आशंका तो तब भी व्यक्त की गई थी जब देश ने आर्थिक सुधार की नीति पर चलने का फैसला लिया था. कहा गया था कि देश की कंपनियां प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगी लेकिन हुआ इसका उल्टा. अत: हमें विदेशी निवेश को लेकर डर का माहौल बनाने की जरूरत नहीं है. पूंजी निवेश हमारी जरूरत है और इससे हमारे बाजार को मदद ही मिलेगी. इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरेगा और बाजार में तरलता आएगी. सरकार को चाहिए कि विरोध के बाद वे अपने कदम न खींचे बल्कि विरोधियों को इसके सकारात्मक पहलुओं से वाकिफ करवाएं.

बढ़ती ही रहेगी महंगाई

पंडित-: शीत सत्र की शुरुआत से ही संसद ठप है. गतिरोध की वजहों में महंगाई का मुद्दा भी शामिल है.

सवाल उठता है कि क्या संसद सत्र को ठप करके मंहगाई पर काबू पाया जा सकता है? क्या बहस से मंहगाई काबू में आ जाएगी?

पिछले अनुभवों से तो ऐसा नहीं लगता. लेकिन यह बात शायद विपक्षी नेताओं की समझ में नहीं आ रही है. सचाई यह है कि विकास के पायदान पर ऊपर की ओर अग्रसर देश में बढ़ती मंहगाई पर काबू पाना लगभग नामुमकिन है. खुली अर्थव्यवस्था में बाजार ही सब कुछ तय करता है जो मांग और आपूर्ति के बहुत ही आधारभूत सिद्धांत पर चलता है.

पिछले दो दशकों में हमारे देश में हर चीज की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है आपूर्ति में बढ़ोतरी नहीं हुई. लिहाजा वस्तुओं के दाम बढ़े हैं. इस अवधि में भारतीयों की खर्च करने की क्षमता में भी तकरीबन दो गुना इजाफा हुआ है. भारत में एक नए मध्यवर्ग का उदय हुआ है जिसके पास पैसा हैं. मैंकेजी के एक सर्वे के मुताबिक अगर भारत की विकास दर भविष्य में वर्तमान स्तर पर कायम रहती है तो भारतीय बाजार और उपभोक्ताओं के नजरिए में क्रांतिकारी बदलाव आ सकता है.

एक मजबूत और नए मध्यवर्ग का उदय संभव है जिसकी आय अगले दो दशकों में लगभग तिगुनी हो जाएगी. इसका फायदा सिर्फ शहरी मध्यवर्ग को नहीं होगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के हाउसहोल्ड आय में भी बढ़ोतरी होगी. जिस ग्रामीण हाउसहोल्ड की आय अभी 2.8 प्रतिशत है उसके अगले दो दशकों में बढ़कर 3.6 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है. जाहिर है, शहरी और ग्रामीण दोनों उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि होगी. नतीजा यह कि खाद्य पदाथरे व अन्य जरूरतों पर लोगों का खर्च बढ़ेगा. यदि उस अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ता तो मूल्य बढ़ोतरी को कतई रोका नहीं जा सकता.

गौरतलब है कि महंगाई सिर्फ भारत में ही नहीं बढ़ रही है. विश्व के कई अन्य देशों में जहां लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है, उनकी आय और क्रयशक्ति में बढ़ोतरी हो रही है. वहां हर तरह की कमोडिटी के दामों में इजाफा हो रहा है. एक अनुमान के मुताबिक अगले दो दशकों में विश्व में खाद्य पदाथरे से लेकर बिजली, पानी, पेट्रोल और गाड़ियों की मांग बेहद बढ़ जाएगी. हर तरह के कमोडिटी की खपत बढ़ने से कीमतों पर भारी दबाव पड़ सकता है.

अंतराष्ट्रीय एजेंसी मैकेंजी की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कैलोरी खपत के बीस फीसद तक बढ़ जाने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसका असर साफ तौर पर खाद्य महंगाई दर पर पड़ेगा और इस सेक्टर की कमोडिटी महंगी हो जाएगी. इसी तरह चीन में भी प्रति व्यक्ति मांस कीखपत में 60 फीसद तक बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है.

वहां मांस की खपत प्रति व्यक्ति 80 किलोग्राम तक सालाना होने का अनुमान है. अगले बीस सालों तक भारत में बुनियादी ढांचे पर भी खासा जोर दिए जाने की योजना है. अगर वह योजना परवान चढ़ती है तो निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली चीजों की खपत बढ़ेगी और अगर उस अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ा तो उसका दबाव भी मूल्य पर पड़ेगा.

ऐसा नहीं है कि कमोडिटी की खपत में इस तरह की बढ़ोतरी से भारत और विश्व का पहली बार पाला पड़ा है. बीसवीं शताब्दी में भी इस तरह का दबाव महसूस किया गया था जब पूरी सदी के दौरान विश्व की जनसंख्या तिगुनी हो गई थी और तमाम तरह की चीजों की मांग में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली थी. लेकिन उस वक्त कीमतों पर यह दबाव इस वजह से ज्यादा महसूस नहीं किया गया था क्योंकि उस सदी के दौरान बहुत सारी वैकल्पिक वस्तुओं की खोज के अलावा पूरे विश्व में कृषि क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव हुआ था. नतीजे में खाद्य उत्पादन में हुई बढ़ोतरी ने मूल्य के दबाव को थाम-सा लिया था और कीमतें बेकाबू नहीं हो पाई.

लेकिन इस सदी में पिछली सदी के मुकाबले तीन तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं. कार्बन उत्सर्जन के चलते मौसम पर पड़ने वाले असर को लेकर जिस तरह से पूरे विश्व में जागरूकता आई है, उससे किसी भी प्रकार का अंधाधुंध उत्पादन संभव नहीं है. दूसरा यह कि अब कमोडिटी आपस में इस कदर जुड़ गए हैं कि एक-दूसरे को प्रभावित करने लगे हैं. मसलन, डीजल की कीमतों में इजाफा होता है तो उसका दबाव खाद्य पदाथरे के मूल्य पर भी पड़ता है.

जरूरत इस बात की है कि सरकारें मूल्य रेगुलेट करने की बजाए कमोडिटी के उत्पादन और मांग के मुताबिक सप्लाई बढ़ाने की नीति बनाएं. इसमें आनेवाली बाधा दूर करें तभी महंगाई पर काबू पाया जा सकता है. अन्यथा हर तीन महीने पर बयान आते रहेंगे लेकिन कीमतें बढ़ती ही रहेंगी.

पाकिस्तान ने लगाई डर्टी पिक्चर पर रोक

पंडित-: विद्या बालन की फिल्म डर्टी पिक्चर पर पाकिस्तान ने उसके बोल्ड दृश्यों के कारण रोक लगा दी है.
प्रतिबंध की पुष्टि करते हुए फिल्म की निर्माता एकता कपूर ने कहा कि मुझे लगता है कि उन देशों के लोग अभी भी महिलाएं और उनके सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों को लेकर असहज हैं.
फिल्म में 80 के दशक की एक डांसिंग स्टार के शिखर तक पहुंचने और बिखरने की कहानी दिखाई गई है.
फिल्म 2 दिसंबर को भारत में प्रदर्शित हो रही है.
विद्या के अलावा नसीरुद्दीन शाह, तुषार कपूर और इमरान हाशमी ने इसमें अभिनय किया है.

Tuesday, November 29, 2011

FDI लागू होने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

पंडित-: कांग्रेस पदाधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि एफडीआई के लागू होने से देश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का फैसला जल्दबाजी में नहीं बल्कि काफी सोच समझ कर लिया गया है। एफडीआई के लागू होने से कृषि उत्पादों की बरबादी कम होगी और किसानों को सीधा फायदा होगा। प्रधानमंत्री यहां पर भारतीय युवा कांग्रेस के चुने पदाधिकारियों के सम्मेलन ‘बुनियाद’ को संबोधित कर रहे थे।

पीएम ने उम्मीद जताई है कि संसद चलाने का रास्ता जल्द निकल आएगा। उनका कहना है कि खुदरा क्षेत्र में निवेश के फैसले को लागू करना राज्यों के लिए जरूरी नहीं है। विपक्षी दल इस सत्र में संसद को ठीक तरह से नहीं चलने दे रहे हैं। मनमोहन ने कहा कि कई नए कानून बनाने हैं लेकिन विपक्ष संसद को काम नहीं करने दे रहा है।

इससे पहले सोमवार को कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने सम्मेलन को संबोधित किया था। राहुल ने साफ किया था कि इस संगठन में उन्होंने काफी बदलाव किया है और अब कांग्रेस में युवा किसी की सिफारिश पर नहीं बल्कि अपने दम पर चुनकर आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पर राहुल की खास नजर है लिहाजा उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस सम्मेलन को काफी अहम माना जा रहा है। इस सम्मेलन में 20 राज्यों के करीब 8,000 युवक कांग्रेस पदाधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कांग्रेस महासचिव बनने और युवक कांग्रेस का प्रभार सम्भालने के बाद राहुल के नेतृत्व में यह अब तक का सबसे बड़ा आयोजन है। इस दो दिवसीय सम्मेलन को ‘बुनियाद’ नाम दिया गया है।

Sunday, November 27, 2011

संसद की कार्यवाही में आज क्या-क्या हुआ !!

नई दिल्ली। खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति दिए जाने के खिलाफ विपक्षी दलों के हंगामे के कारण सोमवार को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।
- लोकसभा में बीजेपी के सांसद मुरली मनोहर जोशी ने एफडीआई के मसले पर कार्यस्थगन प्रस्ताव दिया था।
- सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर हंगामा शुरू कर दिया।
- लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने विपक्षी दलों के हंगामे के कारण कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
-इसी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण राज्यसभा में प्रश्नकाल नहीं हो सका और सभापति हामिद अंसारी ने विपक्ष के कड़े तेवर को देखते हुए कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
-सभापति ने पूछा कि आखिर उनका मुद्दा क्या है और वे शोर क्यों मचा रहे हैं।
- उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने को कहा लेकिन सदस्यों ने उनकी एक न सुनी और वे नारे लगाते हुए सभापति के आसन के पास पहुंच गए।
- डॉ. अंसारी ने सदस्यों को आसन की तरफ आने से रोका पर सदस्य नहीं माने।
-कर्नाटक और केरल के सांसद हाथों में कागज के बैनर लिए हुए थे। वे मुल्लापेरियार बांध को लेकर हंगामा कर रहे थे।
-कार्यवाही दोबारा शुरू होने के बाद भी हंगामा नहीं थमा, जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

विदेशी दुकानों' ने संसद किया ठप, कल सर्वदलीय बैठक संभव

सोनू पंडित : रिटेल सेक्टर में एफडीआई की अनुमति को लेकर संसद के दोनों सदनों में कार्यवाही नहीं हो सकी और दोनों सदनों को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस बीच जारी गतिरोध को दूर करने के लिए मंगलवार को सरकार सर्वदलीय बैठक बुला सकती है। सूत्रों के हवाले से यह खबर आई है।

संसद में जारी गतिरोध को लेकर ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को राष्ट्रपति से मिलकर उन्हें स्थिति से अवगत कराया। दोनों की बैठक करीब 40 मिनट तक चली।
इससे पहले, सोमवार को जब दोनों सदनों की बैठक शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया। हंगामे के चलते पहले सदन की कार्यवाही 12 बजे तक और फिर दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा ने दोनों सदनों में इस मुद्दे पर पहले ही कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया था।
इस बीच, खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेश के खिलाफ विभिन्न गैर कांग्रेस शासित प्रदेश तो पहले से ही थे अब केरल ने भी इसका विरोध किया है।
लोकसभा में भाजपा के मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, जदयू के शरद यादव, माकपा के वासुदेव आचार्य, भाकपा के गुरूदास दासगुप्ता, तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय, सपा के शैलेन्द्र कुमार को सरकार से इस विषय पर सवाल करते देखा गया। भाजपा सदस्य तख्तियां लिये हुए थे जिस पर रिटेल क्षेत्र में एफडीआई को वापस लेने से संबंधित नारे लिखे थे।
इस बीच, टीआरएस के टी चंद्रशेखर राव और विजया शांति तथा आंध्रप्रदेश के कुछ कांग्रेसी सदस्यों को पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के मुद्दे को उठाते देखा गया। केरल से विभिन्न दलों के सदस्य मुल्लापेरियार बांध का विरोध कर रहे थे, उन्होंने अपने हाथों में तख्तियां ली हुई थी।
इस मुद्दे पर कोई नरमी न दिखाने का संकेत लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने भी दिया। सुषमा ने टि्वटर पर कहा कि हम चाहते हैं कि सदन में इस मुद्दे पर चर्चा हो। खुदरा कारोबार में 51 फीसदी एफडीआई के फैसले को स्वीकार नहीं कर सकते।

Saturday, November 26, 2011

पंडित-: 20/11 हमले के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए सुरक्षा बलों ने जीवित आतंकी यानी अजमल कसाब को पकड़ लिया। भारत के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हमले के वीडियो फुटेज में जिस आतंकी को गोलियां बरसाते हुए देखा जा रहा है, वो ही आतंकी आज हमारी जेल में है। लेकिन विडंबना ही रही कि पकड़े जाने के तीन साल बाद तक कसाब हमारा सरकारी दामाद बना हुआ है और उसकी सुरक्षा और देख रेख में करोड़ों रुपए हर साल खर्च किए जा रहे हैं। शहीदों के परिजन कसाब की फांसी पर लटकते हुए देखने के लिए तरस गए हैं लेकिन कसाब आराम से जेल में मटन चिकन उड़ा रहा है।

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